नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर भारत सरकार ने गंभीर चिंता जताई है। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सोमवार (9 मार्च 2026) को संसद में बयान देते हुए कहा कि भारत हमेशा शांति, संवाद और कूटनीति के माध्यम से सभी विवादों का समाधान चाहता है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है। भारत का मानना है कि स्थिति को और बिगड़ने से रोकने के लिए सभी पक्षों को संयम बरतना चाहिए और बातचीत के रास्ते पर लौटना चाहिए। जयशंकर ने कहा कि क्षेत्र के सभी देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाना जरूरी है। साथ ही आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। विदेश मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी भी इस पूरे मामले की समीक्षा कर रही है और क्षेत्रीय सुरक्षा तथा आर्थिक गतिविधियों पर इसके प्रभाव का आकलन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि खाड़ी देशों और ईरान में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं। अनुमान के अनुसार करीब 1 करोड़ भारतीय खाड़ी देशों में रह रहे हैं, जबकि ईरान में भी हजारों भारतीय छात्र और कर्मचारी मौजूद हैं। उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। जयशंकर ने यह भी बताया कि हाल के हमलों के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ है और कुछ भारतीय नाविक भी इसकी चपेट में आए हैं। सरकार ने जनवरी से ही ईरान की यात्रा को लेकर एडवाइजरी जारी की है और भारतीय नागरिकों को सावधानी बरतने की सलाह दी है। सरकार लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित वापस लाने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
West Asia Conflict: भारत ने शांति और संवाद पर दिया जोर, संसद में बोले विदेश मंत्री एस.
