💰 5.50 लाख रुपये में झुंझुनूं के 45 छात्रों को पास कराने की सुनियोजित डील फिक्स
🚔 पुलिस ने कॉलेज एडमिनिस्ट्रेटर, HOD और लेक्चरर समेत 4 लोगों को किया गिरफ्तार
📖 तलाशी में आरोपियों के बैग से पैसों के हिसाब-किताब की 2 डायरियां और मोबाइल चैट बरामद
❌ हंगामे के बाद RPMC डिप्लोमा परीक्षा का पेपर रद्द, परीक्षा केंद्र पर छात्रों का फूटा गुस्सा
📢 नीट के बाद अब पैरामेडिकल में भी धांधली • राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल
5.50 लाख में 45 छात्रों को पास कराने की डील — पैरामेडिकल परीक्षा में बड़ा घोटाला बेनकाब
➤ एक कमरा, 45 छात्र, और 5.50 लाख का सौदा
राजस्थान पैरामेडिकल काउंसिल (RPMC) की डिप्लोमा परीक्षाओं में एक बार फिर बड़ा नकल और पेपर लीक रैकेट बेनकाब हुआ है। मामला जयपुर के प्रभा देवी मेमोरियल पीजी कॉलेज परीक्षा केंद्र से जुड़ा है, जहाँ झुंझुनूं के एक कॉलेज के पूरे 45 छात्रों को एक ही कमरे में बैठाकर सामूहिक रूप से पास कराने की सुनियोजित साजिश रची गई थी।
पूरी साजिश मात्र 5.50 लाख रुपये में 45 छात्रों को पास कराने की थी। शिक्षा माफियाओं ने पूरी परीक्षा प्रणाली को अपने हाथ की कठपुतली बना लिया था, जहाँ योग्यता की नहीं बल्कि पैसों की बोलियां लग रही थीं।
सौदा किए गए छात्र
कुल डील की रकम
कुल गिरफ्तारियां
➤ कैसे खुला राज़ — डायरी और मोबाइल चैट बनी सबूत
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जब तलाशी ली, तो आरोपियों के बैग से दो डायरियां बरामद कीं। इन डायरियों में धांधली की पूरी कहानी दर्ज थी — छात्रों के नाम, उनसे ली गई रकम का पूरा हिसाब-किताब और अन्य गोपनीय डिटेल्स लिखे हुए थे।
इसके अलावा आरोपियों के मोबाइल चैट से ‘शंकर बाजिया सर’ नाम से हुई बातचीत का बड़ा खुलासा हुआ। इस चैट में परीक्षा देने वाले छात्रों के एडमिट कार्ड की PDF फाइलें शेयर की गई थीं — इन सभी PDF पर परीक्षा केंद्र का नाम प्रभा देवी मेमोरियल कॉलेज ही लिखा था, जो इस रैकेट की गहराई को सीधे तौर पर उजागर करता है।
➤ पैसों का लेन-देन — पहले ही पहुंच चुकी थी आधी रकम
इस पूरे सौदे के एवज में 5.50 लाख रुपये की राशि फिक्स की गई थी। पुलिस जांच के अनुसार, यह रैकेट सिर्फ कागजों या बातों तक सीमित नहीं था, बल्कि योजना को धरातल पर उतारने के लिए 27 जून को इसमें से 3.27 लाख रुपये पहले ही रामकृष्ण मंडीवाल के जरिए देवकृष्ण मंडीवाल को एडवांस के तौर पर दे दिए गए थे। बाकी की रकम परीक्षा के बाद देने का प्लान था।
➤ कौन-कौन गिरफ्तार — कॉलेज मैनेजमेंट तक पहुंची आंच
कड़ी पूछताछ में आरोपियों ने कबूल किया कि उन्होंने 45 छात्रों को सामूहिक रूप से लाभ पहुंचाने के लिए कुल 5.50 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट लिया था। इस मामले में प्रभा मेमोरियल पीजी कॉलेज से जुड़े रामकृष्ण मंडीवाल और उनके भतीजे देवकृष्ण मंडीवाल — जो खुद कॉलेज एडमिनिस्ट्रेटर हैं — दोनों को तुरंत गिरफ्तार कर लिया गया।
कुल मिलाकर कॉलेज मैनेजमेंट और फैकल्टी समेत 4 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है — जिसमें एक विभागाध्यक्ष (HOD) और एक लेक्चरर भी शामिल हैं, जो छात्रों को सीधे परीक्षा प्रणाली के भीतर बैठकर अवैध मदद पहुंचा रहे थे।
“कॉलेज प्रशासन और फैकल्टी ही इस नकल रैकेट के मुख्य सूत्रधार थे। पकड़े गए आरोपियों में कॉलेज एडमिनिस्ट्रेटर, HOD और लेक्चरर शामिल हैं जो भीतर से परीक्षा की गोपनीयता को भंग कर रहे थे। गहन जांच जारी है।”
— जयपुर पुलिस (जांच अधिकारी वक्तव्य)
➤ परीक्षा केंद्र पर हंगामा — पेपर हुआ रद्द
जैसे ही इस सामूहिक नकल और सेटिंग की खबर बाहर लीक हुई, परीक्षा केंद्र पर मौजूद अन्य आम छात्रों ने जमकर हंगामा किया। जो छात्र दिन-रात मेहनत से तैयारी करके परीक्षा देने आए थे, उन्होंने जब देखा कि एक पूरा रैकेट पैसों के बल पर सीटों को “खरीद” रहा है, तो उनका गुस्सा सड़क पर उतर आया। भारी विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन को तुरंत कदम उठाते हुए परीक्षा को रद्द करना पड़ा।
➤ शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
यह मामला प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में लगी गहरी दीमक को उजागर करता है। यह कोई अकेली घटना नहीं है — हाल के महीनों में राजस्थान पहले ही NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रहा है, जिसमें भी सीकर और जयपुर के कई बड़े आरोपी पकड़े गए थे। अब पैरामेडिकल परीक्षाओं में भी वही पुराना पैटर्न दोहराया गया — पैसे लेकर परीक्षा रूम फिक्स करना।
सवाल आज भी वही खड़ा है —
जब परीक्षा केंद्र की दीवारों के भीतर ही रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो आम और मेहनती छात्र का भविष्य किसके भरोसे है?
