लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) ने शहर की दो महत्वाकांक्षी परियोजनाओं – आईटी सिटी और वेलनेस सिटी – के लिए बड़ा फैसला लिया है। प्राधिकरण ने इन योजनाओं के प्रथम चरण में आने वाले सुल्तानपुर रोड क्षेत्र के सैकड़ों गांवों में जमीन की खरीद-फरोख्त पर रोक लगा दी है। यह कदम प्रॉपर्टी डीलरों और निवेशकों द्वारा बड़े पैमाने पर की जा रही सट्टेबाजी और मनमानी प्लॉटिंग को रोकने के लिए उठाया गया है।
📜 एलडीए का फैसला: क्या है पूरा मामला?
राज्य सरकार ने एलडीए के प्रस्ताव पर अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद अब ये क्षेत्र भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 की धारा-11 के दायरे में आ गए हैं। इसका मतलब है कि अब इन क्षेत्रों में जिला कलेक्टर की पूर्व अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की भूमि का क्रय, विक्रय या हस्तांतरण पूरी तरह से अवैध होगा।
🗺️ किन-किन इलाकों पर लगी रोक?
एलडीए की अधिसूचना के अनुसार, सुल्तानपुर रोड के निम्नलिखित गांवों में अब भूमि लेन-देन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा:
- प्रथम चरण: सुल्तानपुर, पाली, कुकरैली, बसंतपुर, मड़ियांव, सरोजनगर, चिनहट के 47 गाँव
- द्वितीय चरण (प्रस्तावित): गोसाईगंज, मोहनलालगंज, बक्शी का तालाब के 63 गाँव (जल्द जोड़े जाएंगे)
- आईटी सिटी के लिए: निगोहा, जानग्राम, काकोरी, मलिहाबाद के चुनिंदा क्षेत्र
- वेलनेस सिटी के लिए: कुर्सी रोड, रायबरेली रोड, मोहन रोड के आसपास के गाँव
🏢 एलडीए का प्लान – आईटी सिटी और वेलनेस सिटी क्या होगी?
आईटी सिटी: 500 एकड़ में बनेगी, जहां आईटी पार्क, स्टार्टअप हब, डेटा सेंटर और ग्लोबल कंपनियों के कैंपस होंगे। इससे 50,000 से अधिक युवाओं को रोजगार मिलेगा।
वेलनेस सिटी: 300 एकड़ में बनेगी – यह मेडिकल टूरिज्म, स्पा, योगा सेंटर, मल्टी-स्पेशलिटी अस्पताल और रिहैब सेंटर के लिए डेस्टिनेशन होगी।
प्रोजेक्ट पूरा होने की समयसीमा: 2029
⚠️ प्रॉपर्टी डीलरों की सट्टेबाजी कैसे हो रही थी?
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि प्राधिकरण को पता चला था कि कुछ रियल एस्टेट कारोबारी और निवेशक बड़े पैमाने पर कृषि भूमि खरीद रहे थे। उनका उद्देश्य एलडीए की लैंड पूलिंग नीति के तहत विकसित प्लॉट हासिल करना था, जिससे असली भू-स्वामियों (किसानों) के हित प्रभावित हो रहे थे।
💰 1. डमी खरीदार
डीलर गरीब किसानों को थोड़े पैसे देकर उनके नाम पर जमीन खरीद लेते थे, फिर मुनाफे के लिए आगे बेच देते थे।
सबसे आम धोखा
📈 2. प्लॉट काटना
कृषि भूमि को अवैध रूप से कॉलोनी में बदलकर छोटे-छोटे प्लॉट में बेचा जा रहा था, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था।
विकास को नुकसान
🤝 3. फर्जी पावर ऑफ अटॉर्नी
बुजुर्ग और अनपढ़ किसानों से फर्जी दस्तावेजों पर दस्तखत करा लिए जाते थे, फिर जमीन हड़प ली जाती थी।
कानूनी खामी
— प्रथमेश कुमार, उपाध्यक्ष, एलडीए
⚖️ अब आगे क्या होगा? (एलडीए का प्लान)
- फेज 1 – लैंड पूलिंग: प्रभावित किसानों को एलडीए के साथ करार करना होगा। बदले में उन्हें विकसित प्लॉट मिलेंगे (60% जमीन ली जाएगी, 40% वापस मिलेगी)।
- फेज 2 – मुआवज़ा: जिन किसानों की पूरी जमीन ली जाएगी, उन्हें सरकारी रेट + 50% अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा (भूमि अधिग्रहण अधिनियम के तहत)।
- फेज 3 – टेंडर और विकास: 2027 तक जमीन अधिग्रहण, 2028 तक निर्माण शुरू, 2029 तक आईटी सिटी और वेलनेस सिटी चालू हो जाएगी।
- जनवरी 2025: प्रोजेक्ट का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया।
- मई 2025: प्रॉपर्टी डीलरों की सट्टेबाजी की रिपोर्ट मिली।
- दिसंबर 2025: एलडीए ने सर्वे करवाया, 100+ गाँव चिह्नित किए।
- 1 जून 2026: अधिसूचना जारी, भूमि लेन-देन पर रोक लगी।
- जुलाई 2026: किसानों के साथ लैंड पूलिंग करार शुरू होगा।
📌 प्रभावित किसानों और निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी
- किसानों के लिए हेल्पलाइन: 1800-180-2020 (एलडीए टोल फ्री नंबर)
- शिकायत पोर्टल: ldavikas.up.nic.in पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।
- निवेशकों के लिए सलाह: अगर आपने हाल ही में इन क्षेत्रों में जमीन खरीदी है, तो तुरंत अपने वकील से संपर्क करें। अब ऐसे सभी सौदे अवैध माने जाएंगे।
प्राइम भारत न्यूज़ लखनऊ में एलडीए के इस बड़े फैसले पर लगातार नज़र बनाए हुए है। सभी अपडेट के लिए हमसे जुड़े रहें।
