अमेरिकी शेयर बाजार में एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (SpaceX) के आईपीओ ने जबरदस्त धूम मचा दी | लॉन्च के साथ ही कंपनी के शेयरों में 19 प्रतिशत तक की तेजी देखी गई | लेकिन इस शानदार प्रदर्शन के बीच एक बड़ा विवाद भी सामने आ गया है |
दरअसल, अमेरिकी ब्रोकरेज फर्म फिडेलिटी (Fidelity) ने स्पेसएक्स के इस आईपीओ में निवेश के लिए एंट्री बैरियर को घटाकर मात्र 2 हजार डॉलर कर दिया | साथ ही, उसने एक ऐसी शर्त जोड़ दी, जिसने भारतीय मार्केट एक्सपर्ट्स को हैरान कर दिया |
फिडेलिटी के नियम के मुताबिक, जो भी निवेशक स्पेसएक्स के शेयर आवंटित होने के 15 दिनों के अंदर उन्हें बेचेगा, उसे अगले 90 दिनों के लिए शेयर बाजार से बैन कर दिया जाएगा | इस मनमाने नियम पर भारत के दिग्गज ब्रोकर्स ने सवाल उठाए हैं |
जेरोधा (Zerodha) के संस्थापक नितिन कामथ और कोटक महिंद्रा बैंक के एमडी उदय कोटक ने इस शर्त को गलत बताते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी | उन्होंने कहा कि भारत में ऐसा कोई ब्रोकर नहीं जो निवेशकों के लिए इस तरह का बैन लगा सकता है |

भारत में सेबी के नियम क्या कहते हैं?
इस मामले पर पीएचडी कैपिटल (PHD Capital) नामक मार्केट रिसर्च फर्म से बात की | उन्होंने साफ किया कि भारत में किसी भी ब्रोकरेज फर्म के लिए इस तरह के नियम लागू करना संभव नहीं है | क्योंकि यहाँ आईपीओ से लेकर शेयर की ट्रेडिंग तक, सब कुछ सेबी (SEBI) के नियंत्रण में होता है |
पीएचडी कैपिटल के अनुसार, फिडेलिटी के इस ऑफर को लेकर जो टेंशन है, उसे समझने का सबसे आसान तरीका यह है कि – यह बैन किसी सरकारी रेगुलेटर ने नहीं, बल्कि खुद ब्रोकर ने लगाया है | यानी फिडेलिटी खुद तय कर रही है कि निवेशक कौन है और वह कब शेयर बेच सकता है |
लेकिन भारत में ऐसा नहीं हो सकता | यहाँ कोई भी ब्रोकरेज फर्म निवेशकों को इस तरह बैन नहीं कर सकती | सेबी के नियम हर ब्रोकर के लिए समान होते हैं, और कोई भी ब्रोकर अपनी मनमानी नहीं चला सकता |
भारतीय रिटेल निवेशक को पहले ही मिनट से आजादी
पीएचडी कैपिटल ने यह भी बताया कि भारतीय शेयर बाजार में किसी भी रिटेल निवेशक के लिए कोई लॉक-इन पीरियड (Lock-in Period) नहीं होता | अगर आपने किसी कंपनी के आईपीओ में निवेश किया और वह शेयर मार्केट में लिस्ट हो गया, तो आप लिस्टिंग के दिन सुबह 10 बजे से ही कभी भी अपने शेयर बेच सकते हैं | यानी आप प्रॉफिट बुकिंग करके कभी भी बाहर निकल सकते हैं |
अगर सेबी को यह पता चलता है कि किसी ब्रोकर ने निवेशकों को ब्लैकलिस्ट करने वाला ऐसा कोई नियम बनाया है, तो सेबी तुरंत उस ब्रोकर पर कार्रवाई करके उसे बैन कर देगी | भारतीय मार्केट में रेगुलेटर ही सबसे ऊपर है, कोई ब्रोकर नहीं |
निष्कर्ष
फिडेलिटी की यह शर्त भारतीय निवेशकों के लिए बिल्कुल अस्वीकार्य है | भारत में सेबी ने ऐसी किसी भी मनमानी को पहले ही अवैध घोषित कर रखा है | अमेरिकी बाजार की यह प्रथा भारत में कभी लागू नहीं हो सकती | सेबी के मजबूत नियम ही भारतीय निवेशकों की सबसे बड़ी ताकत हैं |
