ईरान-इज़राइल तनाव और होर्मुज संकट से कच्चे तेल में उछाल, भारत में कीमतों को लेकर अटकलें तेज

ईरान और पश्चिम एशिया में जारी तनाव तथा होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी संभावित आपूर्ति बाधाओं के चलते वैश्विक कच्चे तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतें 70–75 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100 डॉलर के पार पहुंचने की खबरें सामने आ रही हैं, जबकि कुछ समय के लिए यह 115 डॉलर प्रति बैरल तक जाने के दावे भी किए जा रहे हैं।
इस वैश्विक उथल-पुथल का असर कई देशों पर दिखने लगा है। अमेरिका, यूरोप, ब्रिटेन, पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी की रिपोर्ट सामने आई है।
हालांकि, भारत में फिलहाल स्थिति अलग है। सरकारी तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों के बावजूद रिटेल पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिली हुई है।
इसी बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि भारत में आगामी कुछ राज्यों के विधानसभा चुनावों के बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इस तरह के दावों पर अभी तक सरकार या तेल कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल कीमतें पूरी तरह अंतरराष्ट्रीय बाजार, कच्चे तेल की सप्लाई और डॉलर-रुपया विनिमय दर पर निर्भर करती हैं, इसलिए भविष्य में बदलाव वैश्विक परिस्थितियों पर आधारित होगा।