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‘रामायण जैसी लगी गदर’, सनी देओल पहली पसंद नहीं थे? अनिल शर्मा ने खोले 25 साल पुराने राज

भारतीय सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ मनोरंजन का माध्यम नहीं बनतीं, बल्कि एक सांस्कृतिक आंदोलन का रूप ले लेती हैं। ऐसी ही फिल्मों में शामिल है ‘गदर: एक प्रेम कथा’, जिसने साल 2001 में रिलीज होकर बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया था। आज इस फिल्म को रिलीज हुए पूरे 25 साल हो चुके हैं, लेकिन इसके संवाद, गाने और किरदार आज भी दर्शकों के दिलों में जिंदा हैं।
25 साल बाद अनिल शर्मा का बड़ा खुलासा
फिल्म के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर निर्देशक अनिल शर्मा ने कई दिलचस्प बातें साझा कीं। उन्होंने बताया कि ‘गदर’ उनके लिए सिर्फ एक फिल्म नहीं थी, बल्कि एक भावनात्मक यात्रा थी, जो उन्हें भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों के बेहद करीब ले गई।
अनिल शर्मा ने बातचीत के दौरान यह भी संकेत दिया कि फिल्म के शुरुआती दौर में कई कलाकारों के नामों पर चर्चा हुई थी। हालांकि बाद में सनी देओल को तारा सिंह के किरदार के लिए चुना गया और उन्होंने ऐसा अभिनय किया कि यह किरदार भारतीय सिनेमा के सबसे यादगार किरदारों में शामिल हो गया।
निर्देशक के अनुसार, जब फिल्म बन रही थी तब किसी को अंदाजा नहीं था कि यह इतनी बड़ी ब्लॉकबस्टर साबित होगी। रिलीज के बाद सिनेमाघरों के बाहर लंबी कतारें देखने को मिलीं और दर्शकों ने फिल्म को दिल खोलकर प्यार दिया।
‘रामायण जैसी लगी गदर’
अनिल शर्मा ने कहा कि उन्हें ‘गदर’ की कहानी और भावनाएं भारतीय महाकाव्य रामायण जैसी महसूस होती थीं। फिल्म में परिवार, प्रेम, त्याग और संघर्ष जैसे तत्व मौजूद थे, जिनसे आम दर्शक खुद को जोड़ पाते थे।
25 साल बाद भी ‘गदर’ भारतीय सिनेमा की सबसे प्रभावशाली फिल्मों में गिनी जाती है। फिल्म के संवाद, देशभक्ति का जज्बा और तारा सिंह का किरदार आज भी लोगों के बीच उतना ही लोकप्रिय है जितना रिलीज के समय था। यही वजह है कि गदर केवल एक फिल्म नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय बन चुकी है।
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