राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर आज निजी स्कूलों की मनमानी के खिलाफ युवाओं और अभिभावकों ने जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने निजी और प्राइवेट स्कूलों पर नियम लागू करने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ नाराजगी जाहिर की।
बताया जा रहा है कि नेपाल के प्रधानमंत्री द्वारा प्राइवेट और निजी स्कूलों को लेकर दिए गए बयान और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो के बाद उत्तर प्रदेश में भी इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है। इसी के चलते युवाओं और आम जनता ने मांग उठाई है कि प्रदेश में निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली पर सख्त नियम बनाए जाएं ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।
प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि निजी स्कूल फीस, किताबों और ड्रेस के नाम पर अभिभावकों से मनमानी वसूली कर रहे हैं। स्कूलों द्वारा अभिभावकों को महंगी किताबें और यूनिफॉर्म केवल चयनित दुकानों से खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
अभिभावकों ने कहा कि हर साल नए सत्र की शुरुआत में यह समस्या सामने आती है और बच्चों की पढ़ाई का खर्च इतना बढ़ जाता है कि गरीब व्यक्ति अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिलाने में असमर्थ नजर आता है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शिक्षा का अधिकार हर बच्चे का है, लेकिन निजी स्कूलों की बढ़ती फीस और मनमानी के कारण यह अधिकार अब गरीब परिवारों की पहुंच से दूर होता जा रहा है।
युवाओं ने सरकार से मांग की कि निजी स्कूलों की फीस, किताबों और ड्रेस को लेकर स्पष्ट नियम बनाए जाएं और स्कूल प्रशासन की मनमानी पर रोक लगाई जाए। प्रदर्शन में शामिल युवाओं ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले दिनों में आंदोलन और तेज किया जाएगा।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आज एक गरीब व्यक्ति अपने बच्चों को शिक्षित करने के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है, जबकि दूसरी ओर निजी स्कूलों की मनमानी लगातार बढ़ती जा रही है। ऐसे में सरकार को इस पूरे मामले पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।
