🏠 एक झटके में बेघर हुए 1600 लोग, बारिश के मौसम में 80 से अधिक मकानों को किया गया जमींदोज
🛑 सबसे बड़ा विरोधाभास: सरकारी कार्रवाई की जद में आए PM आवास योजना के तहत बने 32 पक्के मकान
👮 सुरक्षा के कड़े इंतजाम — ग्रामीणों के भारी विरोध को दबाने के लिए तैनात किए गए 4000 पुलिस जवान
📢 कांग्रेस ने घेरा, बीजेपी विधायक ने दिया आश्वासन: “पुनर्वास के तहत नया रायपुर में मिलेगा पक्का मकान”
🔥 ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, जेसीबी पर की पत्थरबाजी — क्या गरीबों को उजाड़कर बनेंगे वीआईपी बंगले?
गरीबों का आशियाना खाक — विधायकों के बंगले बनेंगे!
➤ वह सुबह जो तबाही लेकर आई
29 जून 2026। सोमवार की सुबह। रायपुर के माना इलाके का नकटी गांव। प्रस्तावित हाई-प्रोफाइल विधायक कॉलोनी के निर्माण के लिए प्रशासन ने यहाँ करीब 80 से अधिक मकानों को हटाने की औचक कार्रवाई शुरू की। 48 घंटे की दी गई बेहद संक्षिप्त मोहलत खत्म होते ही भारी पुलिस बल, 14 बुलडोजर और प्रशासनिक टीम अचानक मौके पर पहुंच गई।
जेसीबी मशीनों की गड़गड़ाहट के बीच — दशकों से बसे गरीब परिवारों के आशियाने और सपने देखते ही देखते मलबे के ढेर में बदल गए। चारों तरफ चीख-पुकार और बेबसी का माहौल छा गया।
तैनात पुलिस जवान
सक्रिय बुलडोजर (JCB)
बेघर हुए ग्रामीण
➤ ज़मीन कितनी, मशीनें कितनी, फौज कितनी
नकटी गांव की लगभग 55 एकड़ शासकीय जमीन पर आधुनिक विधायक कॉलोनी का निर्माण किया जाना है। इसके लिए प्रशासन ने जो बंदोबस्त किया था, वह भी चौंकाने वाला था — कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर मौके पर करीब 4000 पुलिस जवान तैनात किए गए थे। इनके अलावा 14 बुलडोजर, 250 कोटवार और लगभग 300 टीम प्रहरियों को भी इस ध्वस्तीकरण अभियान में झोंका गया था।
गरीबों के मिट्टी और कंक्रीट के घर तोड़ने के लिए — 4000 जवान और 14 बुलडोजर की यह भारी-भरकम फौज। यह आँकड़ा ही इस पूरी कार्रवाई की भयावहता को बयां करने के लिए काफी है।
➤ PM आवास में पैसा आया — अब वही ‘अवैध’ कैसे?
इस पूरे डार्क एपिसोड का सबसे बड़ा और चौंकाने वाला विरोधाभास यही है। प्रशासन ने जिन मकानों को अवैध बताकर जमींदोज कर दिया, उनमें प्रधानमंत्री आवास योजना और इंदिरा आवास योजना के तहत सरकारी फंड से बने 32 पक्के मकान भी शामिल थे।
आक्रोशित ग्रामीणों का सीधा सवाल है कि जिस गाँव और घर को बसाने के लिए खुद सरकार ने पैसा दिया, बकायदा बिजली और पानी का कनेक्शन जारी किया, जहाँ सरकारी स्कूल तक खोल दिया गया — वही आशियाने रातों-रात ‘अवैध कब्जा’ और अतिक्रमण कैसे घोषित हो गए?
➤ विरोध, पथराव और धक्का-मुक्की
जैसे ही तड़के सुबह जेसीबी मशीनें गरजते हुए गांव की सीमा में दाखिल हुईं, सैकड़ों ग्रामीण अपने बच्चों और बुजुर्गों के साथ घरों के सामने लेट गए और कार्रवाई का तीखा विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते पुलिस व ग्रामीणों के बीच हिंसक धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
अपने जीवनभर की पूंजी को बिखरता देख कुछ हताश लोगों ने बुलडोजरों पर पत्थरबाजी भी कर दी, जिसके बाद भारी तनाव को देखते हुए पुलिस ने बलपूर्वक प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा और अभियान को लगातार जारी रखा।
“प्रशासन नकटी के 75 प्रभावित परिवारों के व्यवस्थित पुनर्वास के लिए प्रतिबद्ध है। सभी विस्थापितों को नया रायपुर के सेक्टर-30 स्थित EWS आवासों में अस्थायी और स्थायी रूप से बसाने की त्वरित व्यवस्था की जा रही है, किसी के साथ भी अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।”
— जिला प्रशासन एवं स्थानीय बीजेपी विधायक अनुज शर्मा (सफाई वक्तव्य)
➤ राजनीतिक घमासान और सांसद का टूटा भरोसा
इस बड़ी कार्रवाई ने छत्तीसगढ़ की सियासत में उबाल ला दिया है। महज तीन दिन पहले ही नकटी के डरे हुए पीड़ितों ने रायपुर के सांसद बृजमोहन अग्रवाल से गुहार लगाई थी। सांसद ने उन्हें पूरा आश्वासन दिया था कि बिना ठोस पुनर्वास व्यवस्था के उनके घरों को कोई हाथ नहीं लगाएगा, लेकिन तीन दिन बाद ही सारे वादे बुलडोजर के टायरों के नीचे कुचल दिए गए।
मामले को लपकते हुए मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने प्रभावित गांव में ही चौपाल लगा दी और सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि विधायकों की आलीशान ऐश-ओ-आराम की कॉलोनी के लिए गरीबों का चूल्हा बुझाया जा रहा है।
➤ असली सवाल
ग्रामीणों का साफ आरोप है कि उनके पूर्वजों की पुश्तैनी और बसी-बसाई जमीन को वीआईपी विधायक कॉलोनी के नाम पर जबरन खाली कराने की एक बड़ी संगठित साजिश रची गई है। बारिश के इस अनिश्चित मौसम में बिना किसी मुआवजे और पुख्ता वैकल्पिक ठिकाने के वे यहाँ से हटने को कतई तैयार नहीं हैं।
महज 48 घंटे का क्रूर नोटिस — मूसलाधार बारिश का मौसम — बिलखते बच्चे, बूढ़े और महिलाएं।
क्या वाकई गरीबों के आशियाने उजाड़कर विधायकों के आलीशान बंगले बनाना ही असली ‘विकास’ है?
यह सुलगता सवाल अब सिर्फ नकटी गांव का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का है।
